पर्यावरण प्रेमी एवं वन मंडल प्रशासन से अपील

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July 14, 2026

पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ वन्य जीव संरक्षण को केंद्र में रखकर हो पौधारोपण

जुलाई का महीना आते ही पूरे प्रदेश सहित हमारे जिले में पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से बड़े पैमाने पर पौधारोपण अभियान प्रारंभ हो जाते हैं। पर्यावरण प्रेमी, सामाजिक संस्थाएं, विद्यालय, महाविद्यालय तथा वन मंडल प्रशासन विभिन्न स्थानों पर लाखों पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित करते हैं। यह निश्चित रूप से एक सराहनीय और आवश्यक पहल है, क्योंकि बढ़ते प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन, घटते वन क्षेत्र और बढ़ते तापमान के बीच अधिक से अधिक वृक्षारोपण समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन चुका है। किंतु केवल पौधे लगा देना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका संरक्षण करना और सही प्रजातियों का चयन करना भी उतना ही आवश्यक है।

आज आवश्यकता इस बात की है कि पौधारोपण केवल आंकड़ों तक सीमित न रहे, बल्कि उसका वास्तविक लाभ पर्यावरण, जैव विविधता और वन्य जीवों को भी प्राप्त हो। विशेष रूप से जंगलों में किए जाने वाले पौधारोपण के दौरान ऐसी पौध प्रजातियों का चयन किया जाना चाहिए जो वहां रहने वाले वन्य जीवों के जीवन और भोजन की आवश्यकताओं को भी पूरा कर सकें।

जानकारी के अनुसार अनेक स्थानों पर वन विभाग द्वारा सागौन, यूकेलिप्टस अथवा अन्य व्यावसायिक दृष्टि से महत्वपूर्ण पौधों का अधिक रोपण किया जाता है। इन वृक्षों का अपना आर्थिक महत्व अवश्य है, लेकिन इनसे जंगल में रहने वाले अधिकांश वन्य जीवों को पर्याप्त भोजन उपलब्ध नहीं हो पाता। परिणामस्वरूप हिरण, नीलगाय, बंदर, भालू, पक्षी तथा अन्य वन्य प्राणी भोजन और पानी की तलाश में जंगलों से निकलकर गांवों और खेतों की ओर आने को मजबूर हो जाते हैं। इससे मानव-वन्य जीव संघर्ष बढ़ता है, किसानों की फसलें नष्ट होती हैं और कई बार वन्य जीवों का जीवन भी संकट में पड़ जाता है।

यदि पौधारोपण अभियान के दौरान फलदार तथा स्थानीय जैव विविधता के अनुरूप पौधों को प्राथमिकता दी जाए तो यह समस्या काफी हद तक कम हो सकती है। महुआ, जामुन, आंवला, बेल, गूलर, बरगद, पीपल, आम, बेर, करंज, चार, हर्रा, बहेड़ा, तेंदू तथा अन्य स्थानीय फलदार और चारा देने वाले वृक्ष अनेक प्रकार के वन्य जीवों, पक्षियों और कीटों के लिए भोजन एवं आश्रय का महत्वपूर्ण स्रोत बनते हैं। ऐसे वृक्ष न केवल जंगल की पारिस्थितिकी को मजबूत करते हैं, बल्कि भूजल संरक्षण, मिट्टी की उर्वरता, जैव विविधता और प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
जंगल केवल पेड़ों का समूह नहीं हैं, बल्कि वे असंख्य जीव-जंतुओं, पक्षियों, वनस्पतियों और सूक्ष्म जीवों का साझा घर हैं। प्रत्येक जीव प्रकृति के संतुलन को बनाए रखने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यदि वन्य जीव सुरक्षित रहेंगे तो जंगल सुरक्षित रहेंगे और यदि जंगल सुरक्षित रहेंगे तो मानव जीवन भी सुरक्षित रहेगा। स्वच्छ वायु, पर्याप्त वर्षा, शुद्ध जल, उपजाऊ भूमि और स्वस्थ पर्यावरण का आधार भी हमारे वन ही हैं।

इसलिए वन मंडल प्रशासन, पर्यावरण प्रेमियों, सामाजिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों तथा आम नागरिकों से विनम्र अपील है कि पौधारोपण अभियान को केवल औपचारिकता या लक्ष्य पूर्ति तक सीमित न रखें। पौधों का चयन स्थानीय परिस्थितियों और वन्य जीवों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर किया जाए। जितना महत्व पौधे लगाने को दिया जाता है, उतना ही महत्व उनके संरक्षण, नियमित देखभाल और जीवित रखने को भी दिया जाना चाहिए।

यदि प्रत्येक पौधारोपण अभियान पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ वन्य जीव संरक्षण की भावना को भी अपने केंद्र में रखेगा, तभी हमारा यह प्रयास वास्तव में सफल और सार्थक सिद्ध होगा। प्रकृति, जंगल और वन्य जीव एक-दूसरे के पूरक हैं। इनमें से किसी एक की उपेक्षा अंततः मानव समाज के लिए भी गंभीर संकट उत्पन्न कर सकती है।

आइए, इस वर्ष संकल्प लें कि हम केवल वृक्ष नहीं लगाएंगे, बल्कि ऐसे वृक्ष लगाएंगे जो जंगल को जीवन दें, वन्य जीवों को भोजन दें, पक्षियों को आश्रय दें और आने वाली पीढ़ियों को एक सुरक्षित, समृद्ध एवं संतुलित पर्यावरण प्रदान करें। यही सच्चे अर्थों में पर्यावरण संरक्षण और वन्य जीव संरक्षण का सबसे प्रभावी अभियान होगा।

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