श्री श्याम मंदिर अस्थान ट्रस्ट सिलगी बम्हनी मंडला

यदि किसी एक शक्ति से भक्त के हृदय में श्रद्धा के साथ सेवा और समाज-निर्माण की ज्योति प्रज्वलित करने की क्षमता है, तो वह है भगवान श्री खाटूस्यामजी की असीम महिमा। सनातन धर्म की परंपरा सदैव यह रही है कि मंदिर केवल ईश्वर के दर्शन का स्थान नहीं, बल्कि समाज-सेवा और मानव-कल्याण का केंद्र भी होता है। मंडला की पावन भूमि पर अब एक ऐसा ही भव्य और दिव्य मंदिर रचा जा रहा है – भगवान श्री खाटूस्यामजी का भव्य मंदिर निर्माण। यह मंदिर, जो मंडला जिले से लगभग 25 किलोमीटर दूर बंहनी बाजार के सिलगी में बन रहा है, केवल पत्थरों का ढांचा नहीं, बल्कि भक्ति और सेवा का संगम प्रतीक होगा। इस महान कार्य को श्री श्याम मंदिर अस्थान ट्रस्ट व अनेक धर्मप्रेमियों के सहयोग से 18 दिसंबर 2024 को भूमिपूजन के साथ प्रारंभ किया गया।

ढाई एकड़ पावन भूमि पर सेवा और आराधना का संगम

यह मंदिर केवल पूजा का स्थान नहीं होगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणा केंद्र बनेगा। श्री श्याम अस्थान ट्रस्ट का संकल्प है कि मंदिर के साथ-साथ मानवता के लिए अनेक सेवा-कार्य प्रारंभ किए जाएंगे – जिनमें यह मंदिर एक आदर्श रूप में विकसित होगा, जिसमें भक्ति, सेवा और समाज के प्रति जिम्मेदारी का भाव निहित होगा।

इस पावन कार्य में ट्रस्ट के सक्रिय सदस्य और भगवान श्री खाटूस्यामजी के परम भक्त श्री संतोष गोयल, तथा उनके साथ जुड़े सभी सदस्य, पूरे सनातनी समाज से हृदयपूर्वक निवेदन करते हैं –

ढाई एकड़ पावन भूमि पर सेवा और आराधना का संगम
आपका सहयोग, चाहे छोटा हो या बड़ा, इस भव्य मंदिर के हर पत्थर में, हर दीवार में, हर आरती में सदा स्मरण रहेगा।
2030 तक मंदिर पूर्ण होने के पश्चात यह केवल एक धार्मिक धरोहर नहीं, बल्कि समाज-सेवा का विशाल केंद्र होगा, जहां से अनेक पवित्र योजनाएं संचालित होंगी:

 

गौशाला का निर्माण – गौ माता की सुरक्षा और सेवा हेतु एक विशाल गौशाला, जिसमें देसी नस्ल की गायों का संरक्षण किया जाएगा।

स्वास्थ्य सेवा – “नर सेवा ही नारायण सेवा” के भाव से, विभिन्न चिकित्सकों की टीम द्वारा नि:शुल्क स्वास्थ्य सेवाएं।

योग एवं ध्यान केंद्र – योग प्रशिक्षण केंद्र और समृद्ध पुस्तकालय, जहां हर व्यक्ति ज्ञान और स्वास्थ्य दोनों का लाभ उठा सके।

भक्तों के लिए आवास व्यवस्था – मंदिर आने वाले सभी श्रद्धालुओं के लिए परिसर के भीतर ही उचित वातावरणयुक्त आवास।यह मंदिर केवल ईंट-पत्थर से नहीं बनेगा – यह मंदिर बनेगा विश्वास से, सेवा से, और उस अदृश्य प्रेम से जो भक्त और भगवान को जोड़ता है। यह स्थान होगा जहां हर व्यक्ति अपने जीवन में नई ऊर्जा, नया साहस और नया संकल्प लेकर लौटेगा।

 

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